यूरोलॉजी · जयपुर हॉस्पिटल
जयपुर में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery)
फंसी हुई पथरी से तेज़ फ्लैंक दर्द; हम जाँच करते हैं, विकल्प समझाते हैं और स्पष्ट योजना देते हैं।
- 1991 से जयपुर की सेवा में (35 साल)
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त
- 24×7 इमरजेंसी और आईसीयू
- कैशलेस: RGHS, मा योजना, CGHS + 22 बीमा कंपनियाँ
- ऑपरेशन का समय
- 45 से 90 मिनट
- एनेस्थीसिया (बेहोशी)
- स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी)
- रिकवरी (ठीक होना)
- डेस्क के काम पर 3 से 5 दिन में वापसी
- कीमत
- ₹60,000 से ₹1,50,000भारत में सामान्य रेंज; हमसे अनुमानित खर्च पूछें
यूरेटेर में फंसी पथरी
यूरेटेर को ब्लॉक करने वाली पथरी से अचानक तेज़ दर्द होता है और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है
जब पथरी किडनी से यूरेटेर में जाती है तो फँस सकती है। इससे पेशाब का बहाव रुक जाता है, जिससे तेज़ फ्लैंक दर्द, मतली, पेशाब में खून और कभी-कभी बुखार होता है। अगर रुकावट बनी रहती है, तो किडनी सूज सकती है और उसकी कार्यक्षमता कम हो सकती है।
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अचानक तेज़ फ्लैंक दर्द
दर्द लहरों में आता है, अक्सर ग्रोइन तक जाता है, जिससे बैठना या सोना मुश्किल हो जाता है।
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पेशाब में खून
पेशाब गुलाबी, लाल या कोला रंग का दिख सकता है क्योंकि पथरी यूरेटेर की परत को खरोंचती है।
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संक्रमण का खतरा
रुका हुआ पेशाब संक्रमित हो सकता है, जिससे बुखार, कंपकंपी और यूरोसेप्सिस नामक गंभीर स्थिति हो सकती है।
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समय के साथ किडनी को नुकसान
लंबे समय तक रुकावट किडनी को फैला देती है और उसकी कार्यक्षमता स्थायी रूप से कम कर सकती है।
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बार-बार इमरजेंसी जाना
दर्द अक्सर मरीज़ों को पक्के इलाज से पहले कई बार इमरजेंसी विभाग में ले आता है।
लगभग 10 में से 1 व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक बार किडनी की पथरी होती है।
जयपुर हॉस्पिटल क्यों
आप बहुत दर्द में हैं, काम छूटने और सर्जरी के खर्च की चिंता है, और आप बस चाहते हैं कि पथरी सुरक्षित तरीके से निकल जाए।
आपके इलाज का प्लान
हमारे साथ आपके पहले कदम
- 1 कॉल करें या यूरोलॉजिस्ट कंसल्टेशन के लिए ओपीडी आएँ
- 2 खून की जाँच, पेशाब की जाँच और इमेजिंग इन-हाउस पूरी करें
- 3 स्टेंट प्लेसमेंट के साथ लेज़र यूरेटेरोस्कोपी करवाएँ, डेकेयर या एक रात रुककर
- 4 दो हफ्ते के अंदर स्टेंट हटाने और फॉलो-अप के लिए वापस आएँ
ऑपरेशन कैसे किया जाता है
स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के तहत, एक पतला स्कोप यूरेथ्रा से पथरी तक पहुँचाया जाता है। लेज़र पथरी को धूल या छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। टुकड़ों के निकलने तक यूरेटेर को खुला रखने के लिए एक अस्थायी स्टेंट लगाया जाता है।
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होल्मियम लेज़र के साथ सेमीरिजिड URS
निचले और मध्य यूरेटेर की पथरी के लिए मानक तरीका; लेज़र सीधी नज़र में पथरी को तोड़ता है।
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ऊपरी यूरेटेर के लिए फ्लेक्सिबल URS
फ्लेक्सिबल स्कोप किडनी के पास (PUJ) की पथरी तक पहुँचता है जहाँ रिजिड स्कोप मुड़ नहीं सकता।
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केवल DJ स्टेंटिंग
अगर यूरेटेर बहुत संकरा है या संक्रमण है, तो पहले स्टेंट लगाकर किडनी को ड्रेन किया जाता है और बाद की प्रक्रिया के लिए यूरेटेर को चौड़ा किया जाता है।
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लेज़र डस्टिंग बनाम बास्केटिंग
डस्टिंग से टुकड़े महीन पाउडर बन जाते हैं जो अपने आप निकल जाते हैं; बास्केटिंग में बड़े टुकड़े स्कोप के ज़रिए निकाले जाते हैं। आपका सर्जन पथरी के आकार और जगह के आधार पर चुनता है।
मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं
- 1991 35 साल से जयपुर की सेवा में
- एनएबीएच मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल
- 24×7 इमरजेंसी, आईसीयू और एम्बुलेंस
- 25 कैशलेस योजनाएँ और बीमा कंपनियाँ
शोध लेज़र यूरेटेरोस्कोपी के बारे में क्या दिखाता है
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औसत ऑपरेटिव समय 82.5 मिनट
एक पूल्ड सीरीज़ में औसत प्रक्रिया लगभग 82 मिनट चली।
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कुल जटिलता दर 10.1%
लगभग 10 में से 1 मरीज़ को जटिलता हुई; अधिकांश मामूली थीं जैसे स्टेंट की परेशानी या यूरिनरी संक्रमण।
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पोस्टऑपरेटिव यूरोसेप्सिस 5.0%
अध्ययनों में यूरेटेरोस्कोपी के बाद गंभीर संक्रमण (यूरोसेप्सिस) की संयुक्त घटना 5% थी।
अगर इलाज न कराया जाए
इलाज न की गई यूरेटेरिक पथरी से बार-बार तेज़ दर्द, बार-बार संक्रमण, किडनी की कार्यक्षमता में लगातार कमी और दुर्लभ मामलों में जानलेवा यूरोसेप्सिस हो सकता है।
इलाज के बाद का जीवन
अधिकांश लोग कुछ दिनों में डेस्क का काम पर लौट आते हैं। स्टेंट हटने के बाद असहजता सुधर जाती है, आमतौर पर एक से दो हफ्ते में।
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कुछ दिनों में काम पर वापसी
अधिकांश लोग 3 से 5 दिन में डेस्क का काम शुरू कर देते हैं; भारी सामान उठाने के लिए एक-दो हफ्ते लग सकते हैं।
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क्लिनिक में स्टेंट निकाला जाता है
अस्थायी स्टेंट सर्जरी के कुछ दिन से दो हफ्ते बाद ओपीडी में निकाला जाता है, आमतौर पर बिना एनेस्थीसिया के।
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पथरी के टुकड़े अपने आप निकलते हैं
पहले हफ्ते में महीन धूल और टुकड़े पेशाब के साथ निकल जाते हैं; पानी पीने से मदद मिलती है।
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फॉलो-अप इमेजिंग से क्लीयरेंस कन्फर्म होती है
फॉलो-अप पर अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे से जाँच होती है कि यूरेटेर साफ़ है और किडनी ठीक से ड्रेन हो रही है।
हमारी टीम से मिलें
हमारे यूरोलॉजी विशेषज्ञ
Care led by Jaipur Hospital's यूरोलॉजी consultants, backed by round-the-clock surgical, diagnostic and critical care support.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बारे में मरीज़ों के सवाल
यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग में क्या होता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग एक न्यूनतम इनवेसिव ऑपरेशन है जिससे यूरेटर की पथरी निकाली जाती है। एक पतला स्कोप यूरेथ्रा और ब्लैडर से होते हुए पथरी तक पहुँचता है। एक होल्मियम लेज़र पथरी को धूल या छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। फिर सर्जन यूरेटर के अंदर एक अस्थायी प्लास्टिक स्टेंट, जिसे डीजे स्टेंट कहते हैं, लगा देते हैं ताकि वह ठीक होने तक खुला रहे।
विस्तार से
यह प्रक्रिया सेमीरिजिड या फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोप से की जाती है, जो पथरी की जगह पर निर्भर करता है। सेमीरिजिड स्कोप निचले और बीच के यूरेटर की पथरी के लिए होते हैं। फ्लेक्सिबल स्कोप किडनी के पास ऊपर की पथरी तक पहुँचते हैं।
लेज़र फाइबर पथरी को तोड़ता है, और बड़ी टुकड़ियों के लिए बास्केट इस्तेमाल हो सकती है। ज्यादातर मरीज़ों को स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) दी जाती है। ऑपरेशन आमतौर पर 45 से 90 मिनट चलता है।
ज्यादातर केस में डीजे स्टेंट लगाया जाता है ताकि सूजन से पेशाब का रास्ता बंद न हो या पथरी के टुकड़े न अटकें। स्टेंट कुछ दिन से लेकर एक-दो हफ्ते तक रहता है और बाद में एक छोटी क्लिनिक विज़िट में निकाल दिया जाता है।
एक आम धारणा
कई लोग सोचते हैं कि इसमें स्किन पर चीरा लगता है।
असल में क्या होता है
ऐसा नहीं है। पूरी प्रक्रिया यूरेथ्रा से होती है, इसलिए पेट पर न टाँके होते हैं न निशान।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आप ओपीडी में अपने सर्जन से मिलेंगे ताकि इमेजिंग देखकर सर्जरी प्लान हो सके। प्री-ऑपरेटिव टेस्ट में यूरिन कल्चर, ब्लड काउंट और किडनी फंक्शन शामिल हैं। हॉस्पिटल स्टे आमतौर पर डेकेयर या एक रात का होता है।
आप 3 से 5 दिन में डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं। स्टेंट निकालने की तारीख डिस्चार्ज से पहले तय हो जाती है। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि अपनी पथरी और सटीक स्टेप्स पर बात हो सके।
यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले मुझे कौनसे टेस्ट और स्कैन चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग से पहले आपको आमतौर पर पथरी लोकेट करने के लिए सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड, किडनी फंक्शन और इन्फेक्शन मार्कर के लिए ब्लड टेस्ट, यूरिन रूटीन और कल्चर, और एनेस्थीसिया के लिए बेसिक फिटनेस टेस्ट जैसे ईसीजी और चेस्ट एक्स-रे (अगर ज़रूरी हो) चाहिए।
विस्तार से
इमेजिंग पथरी का साइज़, लोकेशन और रुकावट की डिग्री बताती है। नॉन-कंट्रास्ट सीटी सर्जिकल प्लानिंग का स्टैंडर्ड है। ब्लड टेस्ट में सीरम क्रिएटिनिन, यूरिया, कम्पलीट ब्लड काउंट और कोएगुलेशन प्रोफाइल शामिल हैं।
यूरिन कल्चर किसी इन्फेक्शन को पहचानता है जिसका सर्जरी से पहले इलाज होना चाहिए ताकि यूरोसेप्सिस का खतरा कम हो। सबूत दिखाते हैं कि प्री-ऑपरेटिव यूटीआई का इलाज और एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस इन्फेक्शन कॉम्प्लिकेशन घटाते हैं।
उम्र और कोमॉर्बिडिटी के हिसाब से एनेस्थीसिया टीम ईसीजी, चेस्ट एक्स-रे या दूसरा क्लीयरेंस माँग सकती है। सभी रिपोर्ट हाल की होनी चाहिए, आमतौर पर प्लांड प्रोसीजर के दो हफ्ते के अंदर।
एक आम धारणा
मरीज़ कभी-कभी यूरिन कल्चर स्किप कर देते हैं अगर उन्हें ठीक लगता है।
असल में क्या होता है
सबूत दिखाते हैं कि अनट्रीटेड यूरिन इन्फेक्शन प्रोसीजर के बाद सीरियस सेप्सिस का खतरा बढ़ाता है, इसलिए कल्चर ज़रूरी है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
सभी हाल की रिपोर्ट इकट्ठा करके अपने प्री-ऑपरेटिव विज़िट में लाएँ। नर्सिंग टीम बताएगी कि कोई और टेस्ट चाहिए या नहीं। फास्टिंग इंस्ट्रक्शन और दवा एडजस्टमेंट उसी समय दिए जाएंगे। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि आपकी प्री-ऑपरेटिव चेकलिस्ट मिले और ज़रूरी इन्वेस्टिगेशन शेड्यूल हों।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) और शुरुआती रिकवरी में कितना दर्द होता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में होती है, इसलिए ऑपरेशन के दौरान आपको दर्द महसूस नहीं होता। सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीज हल्के से मध्यम डिस्कमफर्ट बताते हैं जिसे खाने वाली पेन रिलीफ से कंट्रोल किया जाता है। यूरेटर में लगाया गया स्टेंट कुछ दिनों तक सुस्त दर्द या ब्लैडर में जलन पैदा कर सकता है।
विस्तार से
प्रक्रिया में यूरेटेरोस्कोप यूरेथ्रा से डालकर पथरी तक पहुँचाया जाता है। होल्मियम लेजर पथरी को धूल या छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, जिन्हें फिर निकाल दिया जाता है या फ्लश कर दिया जाता है।
सूजन बैठने तक यूरेटर खुला रखने के लिए आमतौर पर अस्थायी DJ स्टेंट लगाया जाता है।
अध्ययन बताते हैं कि स्टेंट से जुड़े लक्षण जैसे पेशाब करते समय फ्लैंक पेन, बार-बार पेशाब आना, और पेशाब में खून आम हैं लेकिन स्टेंट निकलने के बाद आमतौर पर सुधर जाते हैं। अध्ययनों के मुताबिक बड़ी जटिलताएँ (कॉम्प्लिकेशन) असामान्य हैं, और ज्यादातर डिस्कमफर्ट पहले हफ्ते में ठीक हो जाता है।
एक आम धारणा
कई मरीज तेज दर्द की उम्मीद करते हैं, लेकिन स्टेंट से सुस्त दर्द या ब्लैडर की जलन होती है, न कि तेज सर्जिकल दर्द।
असल में क्या होता है
यह आमतौर पर कुछ दिनों में बैठ जाता है और स्टेंट निकलने के बाद काफी बेहतर हो जाता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
डिस्चार्ज से पहले आपको पेन टैबलेट और जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक का छोटा कोर्स दिया जाएगा। रोज दो से तीन लीटर पानी पिएँ ताकि टुकड़े निकल जाएँ और स्टेंट की जलन कम हो। एक हफ्ते भारी वजन न उठाएँ। स्टेंट आमतौर पर एक से दो हफ्ते बाद OPD में छोटी सी विजिट में निकाला जाता है।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद रिकवरी (ठीक होना) में आमतौर पर कितना समय लगता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में अधिकांश मरीज़ उसी दिन या एक रात रुककर घर चले जाते हैं। आप आमतौर पर तीन से पांच दिन में डेस्क वर्क पर लौट सकते हैं। पूरी रिकवरी (ठीक होना), जिसमें स्टेंट निकालना शामिल है, में लगभग एक से दो हफ्ते लगते हैं। भारी सामान उठाना और ज़ोरदार गतिविधि कम से कम एक हफ्ते तक टालनी चाहिए।
विस्तार से
ऑपरेशन 45 से 90 मिनट का होता है, स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया (बेहोशी) में। थोड़ी देर ऑब्जर्वेशन के बाद, ज़रूरत पड़ने पर दर्द की दवा और एंटीबायोटिक देकर डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
सर्जरी के दौरान डाला गया डीजे स्टेंट एक से दो हफ्ते तक रहता है ताकि यूरेटर ठीक हो सके और टुकड़े निकल सकें।
सबूत दिखाते हैं कि इस दौरान स्टेंट से जुड़े लक्षण जैसे फ्लैंक पेन (कमर दर्द), बार-बार पेशाब आना, और पेशाब में खून आना आम हैं, लेकिन स्टेंट निकलने के बाद सुधर जाते हैं।
अधिकांश मरीज़ एक हफ्ते में सामान्य दैनिक गतिविधियाँ शुरू कर देते हैं, हालांकि शारीरिक मेहनत स्टेंट निकलने तक सीमित रखनी चाहिए। फॉलो-अप इमेजिंग से पथरी निकासी (स्टोन क्लीयरेंस) कन्फर्म की जा सकती है।
एक आम धारणा
कुछ मरीज़ लंबे बेड रेस्ट की उम्मीद करते हैं, लेकिन यह डेकेयर या एक रात की प्रक्रिया है।
असल में क्या होता है
मुख्य सीमा स्टेंट है, जो निकलने तक यूरिनरी लक्षण देता है। स्टेंट निकलने के बाद रिकवरी (ठीक होना) आमतौर पर पूरी हो जाती है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
रोज़ दो से तीन लीटर पानी पिएं ताकि टुकड़े निकलें और स्टेंट की जलन कम हो। दी गई दर्द की गोलियां लें और एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करें। स्टेंट एक छोटी ओपीडी विज़िट में निकाला जाता है, आमतौर पर बिना एनेस्थीसिया (बेहोशी) के। बुखार, कंपकंपी, भारी ब्लीडिंग, या पेशाब न आ पाने पर तुरंत दिखाएं।
क्या मेरी यूरेटेरिक पथरी अपने आप निकल सकती है, और इसकी संभावना कैसे आंकी जाती है?
संक्षेप में
यूरेटेरिक पथरी अपने आप निकलेगी या नहीं, यह मुख्य रूप से उसके आकार और जगह पर निर्भर करता है। जयपुर हॉस्पिटल में आपका सर्जन इमेजिंग और लक्षण देखकर अपने आप निकलने का अंदाज़ा लगाता है। निचले यूरेटर में छोटी पथरी ज़्यादा निकलती है, बड़ी या ऊपरी यूरेटर की पथरी कम।
विस्तार से
निचले यूरेटर में 5 मिलीमीटर से छोटी पथरी के बिना इलाज निकलने की संभावना ज्यादा होती है। बड़ी पथरी, या पेल्वियूरेटेरिक जंक्शन के पास अटकी पथरी, अपने आप कम निकलती है।
आपका सर्जन सीटी या अल्ट्रासाउंड पर पथरी का आकार देखता है, हाइड्रोनेफ्रोसिस जैसे रुकावट के लक्षण ढूंढता है, और दर्द की तीव्रता व संक्रमण के निशान पूछता है।
अगर दर्द कंट्रोल और पानी पीने के बाद भी पथरी नहीं हिलती, या बुखार, क्रिएटिनिन बढ़ना, या बर्दाश्त न होने वाला दर्द हो, तो आमतौर पर सक्रिय इलाज की सलाह दी जाती है। फैसला पथरी के प्राकृतिक इतिहास और किडनी खराब होने या सेप्सिस के खतरे के बीच संतुलन बनाता है।
एक आम धारणा
बहुत लोग इंतज़ार करते रहते हैं कि पथरी निकल जाए, जिससे संक्रमण या किडनी खराब होने का खतरा रहता है।
असल में क्या होता है
आपका सर्जन पथरी का आकार, जगह और आपके लक्षण देखकर ऑब्जर्वेशन की सुरक्षित अवधि तय करता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
आपको कंसल्टेशन से पहले हाल की सीटी केयूबी या अल्ट्रासाउंड और यूरिन कल्चर की ज़रूरत पड़ेगी। सर्जन ऑब्जर्वेशन प्लान समझाएंगे या ज़रूरत होने पर यूरेटेरोस्कोपी, लेज़र से पथरी तोड़ना और स्टेंट डालना बताएंगे।
सर्जरी के बाद ज्यादातर मरीज़ तीन से पांच दिन में डेस्क जॉब पर लौट आते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपनी पथरी और इलाज के सही समय पर चर्चा करें।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के बाद किन यूरिनरी लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए?
संक्षेप में
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी के बाद कुछ लक्षणों पर तुरंत मेडिकल ध्यान देना जरूरी है। जयपुर हॉस्पिटल में आपको सलाह दी जाती है कि तुरंत केयर लें अगर आपको 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बुखार आए, कंपकंपी वाली ठंड लगे, पेशाब न आए, तेज कमर या पेट दर्द हो जो दी गई दवा से न जाए, या थक्कों के साथ भारी खून आए। ये संक्रमण, रुकावट या चोट का इशारा हो सकते हैं जिनका जल्दी इलाज होना चाहिए।
विस्तार से
सबूत दिखाते हैं कि यूरेटेरोस्कोपी के बाद इन्फेक्शन की जटिलताएं, जिनमें यूरोसेप्सिस शामिल है, कुछ मरीजों में होती हैं। जोखिम बढ़ाने वाले कारण हैं पहले से संक्रमण, डायबिटीज, लंबा ऑपरेशन टाइम, और स्टेंट का ज्यादा समय तक रहना।
बुखार और ठंड का मतलब है बैक्टीरिया खून में चले गए हैं। पेशाब न आना मतलब क्लॉट या टुकड़ा स्टेंट या यूरेटर को ब्लॉक कर रहा है। तेज दर्द यूरेटर की ऐंठन, स्टेंट खिसकना, या छूटा हुआ टुकड़ा बता सकता है।
भारी खून आना कम होता है लेकिन इसमें इरिगेशन या स्टेंट एडजस्टमेंट की जरूरत पड़ सकती है। जल्दी जांच गंभीर बीमारी की आशंका कम करती है।
एक आम धारणा
कई मरीज सोचते हैं कि सर्जरी के बाद थोड़ा बुखार या दर्द नॉर्मल है।
असल में क्या होता है
लेकिन यूरेटेरोस्कोपी के बाद बुखार सेप्सिस हो सकता है, जो तेजी से बढ़ता है। घर पर इंतजार न करें।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
इमरजेंसी नंबर पास रखें और लक्षण ठीक होने का इंतजार न करें। अगर आपके स्टेंट में खींचने वाली डोरी है, तो उसे खुद जल्दी न निकालें जब तक कहा न जाए। किसी भी वक्त जयपुर हॉस्पिटल से गाइडेंस के लिए संपर्क करें। जयपुर हॉस्पिटल में फॉलो-अप अपॉइंटमेंट बुक करें अपनी रिकवरी और स्टेंट निकालने के शेड्यूल की समीक्षा के लिए।
मेरा डॉक्टर यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग की सलाह क्यों दे सकता है?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में आपका डॉक्टर यूरेटेरोस्कोपी और डीजे स्टेंटिंग की सलाह दे सकता है अगर आपके यूरेटर में 5 से 20 मिलीमीटर की पथरी है जो अपने आप निकलने की संभावना नहीं रखती या दर्द, रुकावट, संक्रमण या पेशाब में खून पैदा कर रही है। यह प्रक्रिया पथरी निकालती है और रुकावट एक ही बार में दूर करती है।
विस्तार से
यूरेटेरोस्कोपी यूरेटर की उन पथरियों का स्टैंडर्ड इलाज है जो अपने आप निकलने के लिए बहुत बड़ी हैं या जिन पर मेडिकल एक्सपल्सिव थेरेपी असर नहीं करती।
यह तब भी इस्तेमाल होती है जब पथरी बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, लगातार दर्द या रुकावट से किडनी की सूजन पैदा करती है। लेज़र पथरी को असरदार ढंग से तोड़ता है और स्टेंट यूरेटर के ठीक होने तक ड्रेनेज पक्का करता है।
अध्ययनों में फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी और लेज़र लिथोट्रिप्सी ने ऊपरी यूरेटर और किडनी के पास की पथरी के लिए हाई स्टोन-फ्री रेट दिखाई है। यह प्रक्रिया न्यूनतम इनवेसिव है और बाहर कोई कट नहीं लगता। आपका सर्जन पथरी का साइज़, लोकेशन, कम्पोज़िशन और आपकी सेहत देखकर यह ऑप्शन सुझाएगा।
एक आम धारणा
कुछ मरीज़ उम्मीद करते हैं कि दवा से पथरी निकल जाएगी।
असल में क्या होता है
5 से 10 मिलीमीटर से बड़ी पथरी या कॉम्प्लिकेशन वाली पथरी के लिए इंतज़ार अक्सर ज्यादा दर्द, इन्फेक्शन या किडनी डैमेज की वजह बनता है।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
अगर आपको यह प्रक्रिया कराने की सलाह दी गई है, तो अपनी इमेजिंग और ब्लड रिपोर्ट कंसल्टेशन में लाएँ। टीम एनेस्थीसिया के लिए आपकी फिटनेस देखेगी और सर्जरी प्लान करेगी। ज्यादातर मरीज़ 3 से 5 दिन में डेस्क वर्क पर लौट आते हैं। जयपुर हॉस्पिटल में कंसल्टेशन बुक करें ताकि पता चले कि यह इलाज आपके लिए सही है या नहीं।
यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग से पहले के दिनों में मुझे कैसे तैयारी करनी चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरोस्कोपी और DJ स्टेंटिंग से पहले के दिनों में, अपने सर्जन के दवाओं, पानी पीने और आंत की तैयारी के खास निर्देशों का पालन करें। खून पतला करने वाली दवाएँ (ब्लड थिनर) तभी बंद करें जब लिखने वाले डॉक्टर और सर्जिकल टीम कहें। जब तक किसी बीमारी के लिए पानी पर रोक न लगी हो, भरपूर पानी पिएँ।
विस्तार से
आपके यूरिन कल्चर के नतीजों के आधार पर सर्जरी से एक दिन पहले एंटीबायोटिक शुरू करने को कहा जा सकता है। अध्ययन बताते हैं कि एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और यूरोसेप्सिस का खतरा कम करता है।
अगर आप एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, एपिक्साबैन या दूसरी एंटीकॉगुलेंट लेते हैं, तो टीम ब्लीडिंग के खतरे और दवा बंद करने के खतरे का संतुलन देखेगी। गिंको, लहसुन या जिनसेंग जैसे हर्बल सप्लीमेंट ब्लीडिंग बढ़ा सकते हैं, इसलिए उनके बारे में बताएँ।
बिना पूछे नए विटामिन या सप्लीमेंट शुरू न करें। एनेस्थीसिया टीम स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के लिए आपकी फिटनेस जाँचेगी। आपको उपवास के निर्देश मिलेंगे, आमतौर पर प्रक्रिया से छह घंटे पहले मुँह से कुछ न लें।
अगर रात भर रुकना तय है तो एक अटेंडेंट साथ रहने का इंतजाम करें। ढीले आरामदायक कपड़े और डिस्चार्ज के बाद जरूरी अपनी नियमित दवाएँ साथ रखें।
एक आम धारणा
मरीज अक्सर अपनी दिल या स्ट्रोक की दवाएँ खुद बंद कर देते हैं।
असल में क्या होता है
यह खतरनाक हो सकता है। किसी भी नियमित दवा में बदलाव से पहले हमेशा अपने कार्डियोलॉजिस्ट और यूरोलॉजी टीम, दोनों से तालमेल करें।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
सर्जरी की सुबह केवल वही दवाएँ लें जिन्हें एनेस्थेटिस्ट ने मंजूरी दी हो, एक घूँट पानी के साथ। अगर कहा जाए तो एंटीसेप्टिक साबुन से नहाएँ। गहने, कॉन्टैक्ट लेंस और डेंचर निकाल दें। ऑपरेशन 45 से 90 मिनट चलता है।
आपको रिकवरी में एक से दो घंटे निगरानी में रखा जाएगा। ज्यादातर मरीज उसी दिन या अगली सुबह घर चले जाते हैं। स्टेंट आमतौर पर दो हफ्ते के अंदर निकाला जाता है। जयपुर हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट बुक करके अपनी पर्सनलाइज्ड प्री-ऑपरेटिव चेकलिस्ट लें।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के आम साइड इफेक्ट और कम आम लेकिन गंभीर जटिलताएँ क्या हैं?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद आम साइड इफेक्ट में पेशाब में खून, पेशाब करते समय हल्की जलन, बार-बार पेशाब आना, और स्टेंट से फ्लैंक डिस्कमफर्ट शामिल हैं। ये आमतौर पर कुछ दिनों में बैठ जाते हैं। कम आम लेकिन गंभीर जटिलताओं (कॉम्प्लिकेशन) में यूरेटेरिक चोट, इंटरवेंशन की जरूरत वाली ज्यादा ब्लीडिंग, और यूरोसेप्सिस शामिल हैं, जिसे तुरंत हॉस्पिटल में इलाज की जरूरत होती है।
विस्तार से
प्रक्रिया में यूरेटेरोस्कोप यूरेथ्रा से पथरी तक पहुँचाया जाता है, होल्मियम लेजर से पथरी तोड़ी जाती है, और DJ स्टेंट लगाया जाता है। अध्ययन बताते हैं कि स्टेंट से जुड़े लक्षण जैसे हीमैच्यूरिया, डिस्यूरिया, और फ्लैंक पेन सबसे ज्यादा रिपोर्ट होते हैं।
इन्फेक्शन से जुड़ी जटिलताएँ जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और यूरोसेप्सिस कुछ मरीजों में होती हैं; रिस्क फैक्टर्स में प्री-ऑपरेटिव इन्फेक्शन, लंबा ऑपरेटिव टाइम, डायबिटीज, और लंबे समय तक स्टेंट रहना शामिल हैं।
बड़ी जटिलताएँ जैसे यूरेटेरिक परफोरेशन या स्ट्रिक्चर कुछ प्रतिशत केस में रिपोर्ट होती हैं। ज्यादातर इन्फेक्शन की जटिलताएँ मामूली होती हैं और एंटीबायोटिक से ठीक हो जाती हैं, लेकिन यूरोसेप्सिस तुरंत इलाज न होने पर मल्टी-ऑर्गन फेल्योर तक बढ़ सकती है।
एक आम धारणा
बहुत लोग लेजर से यूरेटर को नुकसान की चिंता करते हैं, लेकिन अध्ययन बताते हैं बड़ी चोटें दुर्लभ हैं।
असल में क्या होता है
बड़ी चिंता इन्फेक्शन की है, खासकर अगर सर्जरी से पहले यूरिन इन्फेक्शन था या स्टेंट ज्यादा समय तक रहा। इसलिए हम पहले किसी भी इन्फेक्शन का इलाज करते हैं और स्टेंट जल्दी निकालते हैं।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
डिस्चार्ज पर आपको एंटीबायोटिक और पेन रिलीफ दी जाएगी। खूब तरल पदार्थ लें और एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करें। 38°C से ऊपर बुखार, कंपकंपी, पेशाब न आना, या थक्कों के साथ भारी ब्लीडिंग पर तुरंत ध्यान दें। स्टेंट आमतौर पर एक से दो हफ्ते बाद OPD में निकाला जाता है।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद कौन से लक्षण सामान्य हैं और किनके लिए तुरंत मेडिकल अटेंशन चाहिए?
संक्षेप में
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद सामान्य लक्षणों में खून मिला पेशाब, पेशाब करते समय हल्की जलन, बार-बार पेशाब आना, और फ्लैंक डिस्कम्फर्ट (कमर में बेचैनी) खासकर पेशाब करते समय — ये स्टेंट के कारण होते हैं। ये आमतौर पर कुछ दिन में सुधर जाते हैं। तुरंत ध्यान देने वाले लक्षण हैं: 38°C से ऊपर बुखार, कंपकंपी, थक्कों के साथ भारी ब्लीडिंग, पेशाब न आ पाना, या दवा से काबू न आने वाला तेज़ दर्द।
विस्तार से
प्रक्रिया में डीजे स्टेंट डाला जाता है ताकि सूजन बैठने तक यूरेटर खुला रहे।
सबूत दिखाते हैं कि स्टेंट से जुड़े लक्षण जैसे हीमेच्यूरिया (पेशाब में खून), डिस्यूरिया (जलन), अर्जेंसी (तीव्र इच्छा), और फ्लैंक पेन (कमर दर्द) बहुत आम हैं और आमतौर पर स्टेंट निकलने के बाद ठीक हो जाते हैं।
संक्रामक जटिलताएं (इन्फेक्शस कॉम्प्लिकेशन) कुछ मामलों में होती हैं; एक पूल्ड एनालिसिस में पोस्ट-ऑपरेटिव यूरोसेप्सिस लगभग पांच प्रतिशत मामलों में रिपोर्ट हुआ। जोखिम कारकों में प्री-ऑपरेटिव संक्रमण, डायबिटीज़, लंबा ऑपरेटिव टाइम, और लंबा स्टेंट ड्वेल शामिल हैं।
यूरोसेप्सिस तेज़ी से मल्टी-ऑर्गन फेल्योर तक बढ़ सकता है, इसलिए बुखार के साथ कंपकंपी होने पर तुरंत मूल्यांकन ज़रूरी है।
यूरेटेरिक इंजरी या गंभीर ब्लीडिंग दुर्लभ है लेकिन बढ़ते फ्लैंक पेन या फ्रैंक ब्लड क्लॉट्स के रूप में सामने आ सकती है जो कैथेटर या पेशाब की धार को रोक दे।
एक आम धारणा
कई मरीज़ सोचते हैं कि पेशाब में कोई भी खून खतरनाक है, लेकिन कुछ दिन तक हल्का गुलाबी पेशाब अपेक्षित है।
असल में क्या होता है
असली खतरा संक्रमण (इन्फेक्शन) है — बुखार के साथ कंपकंपी का मतलब संभावित यूरोसेप्सिस है और इसके लिए तुरंत अस्पताल जाना चाहिए, घर पर इंतज़ार नहीं करना चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में आपका अगला कदम
सभी दी गई एंटीबायोटिक और दर्द की दवा लें। खूब तरल पदार्थ लें। अगर बुखार, कंपकंपी, पेशाब न आए, या भारी थक्के दिखें, तो तुरंत जयपुर हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट जाएं। स्टेंट आमतौर पर एक से दो हफ्ते बाद ओपीडी में निकाला जाता है।
सवाल-जवाब
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery): सवाल और जवाब
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पूरी जानकारी
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery): ज़रूरी जानकारी
यूरेटेरिक पथरी क्या है और यह कैसे बनती है
- पेशाब में मौजूद पदार्थ
- कैल्शियम, ऑक्सलेट या यूरिक एसिड गाढ़े होकर क्रिस्टल बनाते हैं
- किडनी में शुरुआत
- अधिकांश पथरी किडनी में छोटी शुरू होती है और अपने आप निकल सकती है
- यूरेटर में रुकावट
- पथरी पेशाब का बहाव रोकती है और तेज दर्द करती है
यूरेटेरिक पथरी (Ureteric Stone Surgery) एक कठोर पिंड है जो किडनी में बनता है और यूरेटर में नीचे चला जाता है। यूरेटर वह पतली नली है जो पेशाब को किडनी से ब्लैडर तक ले जाती है। पथरी तब बनती है जब पेशाब में मौजूद पदार्थ जैसे कैल्शियम, ऑक्सलेट या यूरिक एसिड गाढ़े होकर क्रिस्टल बन जाते हैं।
ज्यादातर पथरियाँ किडनी में छोटी शुरू होती हैं और अपने आप निकल सकती हैं, लेकिन एक बार जब पथरी यूरेटर में चली जाती है तो यह पेशाब के बहाव को रोक सकती है और तेज दर्द पैदा कर सकती है। यूरेटरोस्कोपी के साथ लेजर से पथरी तोड़ना इसका एक आम इलाज है।
एक पतला उपकरण जिसे यूरेटरोस्कोप कहते हैं, मूत्रमार्ग और ब्लैडर के रास्ते पथरी तक पहुँचाया जाता है, और लेजर पथरी को धूल या छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है जिन्हें निकाला जा सकता है या जो अपने आप निकल जाते हैं।
यूरेटेरिक पथरी के लक्षण और कब तुरंत इलाज करवाएँ
- बुखार और ठंड लगना यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (संक्रमण) का संकेत हो सकता है
- पेशाब न निकल पाना इच्छा होने पर भी
सबसे आम लक्षण है पसलियों के नीचे बगल या पीठ में अचानक तेज दर्द, जो निचले पेट और जांघ के जोड़ तक फैल सकता है। दर्द अक्सर लहरों में आता है और साथ में मतली और उल्टी हो सकती है।
आपको पेशाब में खून दिख सकता है, बार-बार पेशाब जाने की इच्छा हो सकती है, या पेशाब करते समय जलन महसूस हो सकती है। अगर इन लक्षणों के साथ बुखार और ठंड लगने लगे, तो यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (संक्रमण) का संकेत हो सकता है, जिसमें उसी दिन तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।
इच्छा होने पर भी पेशाब न निकल पाना एक और चेतावनी संकेत है जिसमें तुरंत देखभाल जरूरी है। प्रक्रिया के बाद कुछ दिनों तक तकलीफ और पेशाब में खून आ सकता है, खासकर अगर स्टेंट लगा हो, और बाकी पथरी के टुकड़े निकलते समय दर्द या मतली हो सकती है।
यूरेटेरिक पथरी के कारण और जोखिम बढ़ाने वाले कारक
- आहार और तरल पदार्थ
- कम तरल पदार्थ लेना, ज्यादा नमक या मांसाहारी आहार
- मेडिकल कंडीशन
- डायबिटीज, गाउट, मोटापा, पारिवारिक इतिहास
- संक्रमण के जोखिम कारक
- अधिक उम्र, डायबिटीज, महिला लिंग, अधिक बीएमआई, पॉजिटिव यूरिन कल्चर
पथरी तब बनती है जब पेशाब में क्रिस्टल बनाने वाले पदार्थ उस तरल पदार्थ से ज्यादा होते हैं जो उन्हें पतला कर सके। कम पानी पीना, नमक या एनिमल प्रोटीन ज्यादा खाना, मोटापा, और डायबिटीज या गाउट जैसी कुछ बीमारियाँ जोखिम बढ़ा सकती हैं। परिवार में किसी को पथरी होना भी इसकी संभावना बढ़ाता है।
अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक उम्र, डायबिटीज मेलिटस, इस्कीमिक हार्ट डिजीज, हाई बॉडी मास इंडेक्स, महिला होना, न्यूरोजेनिक ब्लैडर, और प्रक्रिया से पहले पेशाब की जाँच में संक्रमण निकलना — ये सब यूरेटरोस्कोपी के बाद इन्फेक्शन का खतरा बढ़ाते हैं।
पहले से स्टेंट डालना और प्रक्रिया का समय ज्यादा होना भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ाने से जुड़े पाए गए हैं।
यूरेटेरिक पथरी की पहचान: जाँच और परीक्षण
- खून की जाँच किडनी फंक्शन और कैल्शियम या यूरिक एसिड लेवल देखना
- इमेजिंग पहले अल्ट्रासाउंड, फिर नॉन-कंट्रास्ट सीटी स्कैन से विस्तृत तस्वीर
आपका डॉक्टर आपके लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछेगा और आपके पेट और बगल की जाँच करेगा।
पेशाब की जाँच से पता लगाया जाता है:
- खून
- संक्रमण
- क्रिस्टल
खून की जाँच से किडनी का काम देखा जाता है और कैल्शियम या यूरिक एसिड का स्तर ज्यादा तो नहीं है। इमेजिंग से पथरी का आकार और जगह पक्की होती है। पेट का अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) अक्सर पहला इमेजिंग टेस्ट होता है।
किडनी, यूरेटर और ब्लैडर का नॉन-कंट्रास्ट सीटी स्कैन सबसे साफ तस्वीर देता है और इलाज की योजना बनाने का मानक तरीका है। कुछ मामलों में एक्स-रे काम आ सकता है। एमआरआई की शायद ही कभी जरूरत पड़ती है।
ये जाँचें आपके सर्जन को तय करने में मदद करती हैं कि पथरी अपने आप निकल सकती है या दखल की जरूरत है।
बिना सर्जरी के इलाज के विकल्प और कब सर्जरी की सलाह दी जाती है
छोटी पथरियाँ, आमतौर पर 5 मिलीमीटर से कम, खूब सारे तरल पदार्थ और दर्द की दवा से अपने आप निकल जाती हैं। आपका डॉक्टर अल्फा-ब्लॉकर्स जैसी दवाएँ दे सकता है ताकि यूरेटर ढीला हो और पथरी निकल जाए।
अगर पथरी लगभग 5 से 10 मिलीमीटर से बड़ी है, लगातार दर्द दे रही है, पेशाब का बहाव रोक रही है, या संक्रमण के साथ है, तो आमतौर पर सर्जरी की सलाह दी जाती है:
- लगातार दर्द
- पेशाब का बहाव रोकना
- संक्रमण के साथ होना
यूरेटर में 5 से 20 मिलीमीटर की पथरियों के लिए यूरेटरोस्कोपी के साथ लेजर लिथोट्रिप्सी आमतौर पर इस्तेमाल होती है। किडनी के पास की पथरियों के लिए फ्लेक्सिबल यूरेटरोस्कोप बेहतर पहुँच देता है।
अगर यूरेटर स्कोप के लिए बहुत संकरा है, तो पहले स्टेंट डालकर यूरेटर को चौड़ा किया जाता है और दो से तीन हफ्ते बाद प्रक्रिया तय की जाती है। कुछ मामलों में सिर्फ स्टेंट डालकर अस्थायी निकासी की जाती है अगर पथरी तक पहुँच न हो या सेप्सिस हो।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी की तैयारी
करें
- जाँच रिपोर्ट्स
- बीमा या योजना के कार्ड
- वर्तमान दवाओं की सूची
- आरामदायक कपड़े
- डिस्चार्ज के बाद मदद के लिए अटेंडेंट
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी से पहले आपकी सर्जिकल टीम कुछ नियमित जाँचें माँगेगी। इनमें आमतौर पर खून की जाँच, संक्रमण देखने के लिए पेशाब की जाँच, और एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग शामिल होती है ताकि पथरी की जगह और आकार पक्का हो सके।
अगर आपको यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (संक्रमण) है, तो ऑपरेशन से पहले एंटीबायोटिक्स से उसका इलाज किया जाएगा क्योंकि पहले से मौजूद संक्रमण प्रक्रिया के बाद यूरोसेप्सिस का खतरा बढ़ाता है।
अपने सर्जन को हर दवा के बारे में बताएँ जो आप ले रहे हैं, खासकर ब्लड थिनर्स, डायबिटीज की गोलियाँ या इंसुलिन, और हाल में ली गई कोई एंटीबायोटिक। एनेस्थीसिया (बेहोशी) टीम आपकी सेहत देखकर तय करेगी कि आपके लिए स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न) या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) में से क्या ज्यादा सुरक्षित है। आपको तय समय से कम से कम छह घंटे पहले खाना-पीना बंद करने को कहा जाएगा।
सर्जरी वाले दिन अपनी जाँच रिपोर्ट्स, बीमा या योजना के कार्ड (RGHS, मा योजना, CGHS, या प्राइवेट TPA डिटेल्स), वर्तमान दवाओं की सूची, और घर पहनने के लिए आरामदायक कपड़े साथ लाएँ। डिस्चार्ज के बाद मदद के लिए एक अटेंडेंट साथ आना चाहिए।
जयपुर हॉस्पिटल में 24×7 इमरजेंसी विभाग, इन-हाउस फार्मेसी, और डायग्नोस्टिक लैब साइट पर ही हैं अगर कोई आखिरी वक्त की जाँच जरूरी हो।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) कैसे की जाती है
जयपुर हॉस्पिटल में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) हमारी यूरोलॉजी टीम द्वारा यूरेटेरोस्कोप — एक पतली ट्यूब जिसमें लाइट और कैमरा लगा होता है — को मूत्रमार्ग और मूत्राशय के रास्ते यूरेटर या किडनी में पथरी तक पहुँचाकर की जाती है।
यह प्रक्रिया स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न करना) या जनरल एनेस्थीसिया (पूरी बेहोशी) के तहत की जाती है और आमतौर पर 45 से 90 मिनट लगते हैं।
आपका सर्जन पथरी की जगह, आकार और कठोरता के आधार पर तकनीक चुनेगा:
- जगह
- आकार
- कठोरता
- सेमीरिजिड यूरेटेरोस्कोपी होल्मियम लेज़र के साथ: निचले और बीच के यूरेटर की पथरी के लिए मानक।
- फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी ऊपरी यूरेटर के लिए: पेल्वि-यूरेटेरिक जंक्शन के पास की पथरी तक बेहतर पहुँच।
- केवल DJ स्टेंटिंग: अस्थायी ड्रेनेज अगर पथरी तक सुरक्षित पहुँच न हो या सेप्सिस हो।
- लेज़र डस्टिंग बनाम बास्केटिंग: डस्टिंग पथरी को महीन कणों में तोड़ देती है जो पेशाब के साथ निकल जाते हैं; बास्केटिंग एक छोटी टोकरी से बड़े टुकड़े निकालती है।
ऑपरेशन के दौरान लेज़र फाइबर पथरी को टुकड़ों या धूल में तोड़ता है। टुकड़ों को या तो बास्केट से निकाला जाता है या धोकर बाहर किया जाता है। ज्यादातर मामलों में एक अस्थायी प्लास्टिक स्टेंट (DJ स्टेंट) यूरेटर में रखा जाता है ताकि सूजन कम होने और टुकड़े निकलने तक वह खुला रहे।
स्टेंट पूरी तरह शरीर के अंदर होता है; कोई बाहरी बैग नहीं चाहिए। अगर यूरेटर स्कोप के लिए बहुत संकरा है, तो पहले स्टेंट डालकर उसे फैलाया जाता है और दो से तीन हफ्ते बाद प्रक्रिया दोबारा तय की जाती है।
यह ऑपरेशन न्यूनतम इनवेसिव है जिसमें कोई कट या निशान नहीं पड़ता। ज्यादातर मरीज उसी दिन घर चले जाते हैं या एक रात रुकते हैं।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के जोखिम और संभावित जटिलताएँ
- लगभग 10% कुल जटिलता दर
- लगभग 5% मरीज मामूली जटिलताएँ
- लगभग 5% बड़ी जटिलताएँ
- 5% (95% CI 2.4–8.2%) यूरोस्पेसिस की संयुक्त घटना
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन जटिलताएँ (कॉम्प्लिकेशन) हो सकती हैं। अध्ययनों में कुल जटिलता दर लगभग 10% थी। मामूली जटिलताएँ जैसे स्टेंट की परेशानी, पेशाब में खून, या हल्का संक्रमण (इन्फेक्शन) लगभग 5% मरीजों में हुईं। बड़ी जटिलताएँ जैसे यूरेटरल चोट, ज्यादा खून बहना, या यूरोस्पेसिस लगभग 5% में हुईं।
सबसे ज्यादा बताई गई समस्याएँ हैं यूरेटरल स्टेंट की परेशानी, यूरेटर की दीवार को चोट, और पथरी का खिसकना। संक्रामक जटिलताएँ ऑपरेशन के बाद की लगभग आधी समस्याओं का कारण होती हैं। अध्ययनों में यूरोस्पेसिस की संयुक्त घटना 5% (95% कॉन्फिडेंस इंटरवल 2.4–8.2%) थी।
यूरोस्पेसिस एक गंभीर स्थिति है जिससे मल्टी-ऑर्गन फेल्योर और मौत हो सकती है, हालांकि इसकी दर कम बताई गई है। ज्यादातर संक्रामक जटिलताएँ मामूली होती हैं।
कुछ कारक संक्रमण का जोखिम बढ़ाते हैं:
- डायबिटीज
- अधिक उम्र
- महिला लिंग
- हाई BMI
- इस्कीमिक हार्ट डिजीज
- न्यूरोजेनिक ब्लैडर
- ऑपरेशन से पहले पेशाब की जाँच में संक्रमण निकलना
- लंबा ऑपरेशन टाइम
- प्रक्रिया से बहुत पहले से स्टेंट लगा रहना
इन जोखिमों को कम करने के लिए हमारी टीम एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस देती है, ऑपरेशन से पहले किसी भी संक्रमण का इलाज करती है, ऑपरेशन का समय कम रखती है, और स्टेंट को जल्द से जल्द निकालती है।
अन्य जोखिमों में सभी पथरी के टुकड़े न निकल पाना और लंबे समय तक स्टेंट रखने की जरूरत शामिल है। आपका सर्जन आपको बताएगा कि ये जोखिम आप पर कैसे लागू होते हैं।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के बाद रिकवरी (ठीक होना) और देखभाल
- उसी दिन ज्यादातर मरीज घर जाते हैं
- कुछ दिन से एक-दो हफ्ते स्टेंट आमतौर पर निकाला जाता है
- पहला हफ्ता भारी सामान न उठाएं और कड़ी कसरत न करें
प्रक्रिया के बाद आपको रिकवरी रूम में एक से दो घंटे निगरानी में रखा जाएगा। नर्सिंग टीम बताएगी कि किसी भी परेशानी या दर्द को कैसे संभालना है। ज्यादातर मरीज थोड़ी निगरानी के बाद उसी दिन घर चले जाते हैं। आप आमतौर पर तीन से पांच दिन में डेस्क का काम शुरू कर सकते हैं।
जब तक स्टेंट लगा है, तब तक आप कमर या मूत्राशय में परेशानी महसूस कर सकते हैं, बार-बार पेशाब जाने की इच्छा हो सकती है, या पेशाब में खून दिख सकता है। बचे हुए पथरी के टुकड़े निकलते समय दर्द और उल्टी हो सकती है। ये लक्षण आमतौर पर स्टेंट निकलने के बाद सुधर जाते हैं।
स्टेंट आमतौर पर ऑपरेशन के कुछ दिन से एक-दो हफ्ते बाद निकाला जाता है। कुछ स्टेंट में एक पुल-आउट स्ट्रिंग होती है जो जांघ पर टेप की जाती है ताकि आप या आपका अटेंडेंट उसे घर पर निकाल सके; अन्यथा एक छोटी क्लिनिक विजिट की जरूरत होती है।
खूब पानी पिएं (दिन में लगभग दो से तीन लीटर, जब तक आपके डॉक्टर और न कहें) ताकि टुकड़े निकल जाएँ। दी गई दर्द की दवा या एंटीबायोटिक ठीक वैसे ही लें जैसे बताया गया है। पहले हफ्ते भारी सामान न उठाएं और कड़ी कसरत न करें।
अगर 38°C से ऊपर बुखार आए, दवा से न ठीक होने वाला तेज दर्द हो, थक्कों के साथ ज्यादा खून बहे, पेशाब न आए, या कंपकंपी और उल्टी जैसे संक्रमण के लक्षण दिखें, तो जयपुर हॉस्पिटल को कॉल करें या 24×7 इमरजेंसी विभाग में जाएं। ये यूरोस्पेसिस या ब्लॉक्ड स्टेंट के संकेत हो सकते हैं और तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) के नतीजे
अध्ययनों में फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी और लेज़र लिथोट्रिप्सी से यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) की औसत स्टोन-फ्री दर लगभग 94% थी। 2 से 3 सेमी की पथरी के लिए स्टोन-फ्री दर 95.7% थी; 3 सेमी से बड़ी पथरी के लिए 84.6%।
अनुभवी हाथों में फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी 2 सेमी से बड़ी पथरी का सफल इलाज कर सकती है जिसमें स्टोन-फ्री दर ज्यादा और जटिलता दर कम होती है। एक तुलनात्मक अध्ययन में पाया गया कि 2–3 सेमी की किडनी की पथरी के लिए फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी को कम सेकंड-स्टेज प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ी और यह पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी जितनी ही प्रभावी थी।
स्टोन-फ्री दरें अध्ययनों में अलग-अलग होती हैं क्योंकि "स्टोन-फ्री" की परिभाषा और फॉलो-अप के लिए इस्तेमाल इमेजिंग में अंतर होता है। पथरी का आकार और जगह भी नतीजे पर असर डालते हैं। आपका सर्जन सलाह देगा कि एक ही प्रक्रिया से आपकी पथरी साफ होने की संभावना है या दूसरी सिटिंग की जरूरत पड़ सकती है।
समय के साथ पथरी दोबारा होना (दोबारा होना) मुमकिन है। पर्याप्त तरल पीना, खान-पान में बदलाव, और किसी भी अंतर्निहित मेटाबोलिक कारण का इलाज नई पथरी बनने की संभावना कम कर सकता है। आपका यूरोलॉजिस्ट ऑपरेशन के बाद मेटाबोलिक वर्क-अप का सुझाव दे सकता है ताकि लंबे समय की रोकथाम में मदद मिले।
जयपुर में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) का खर्च और बीमा
भारत में यूरेटेरिक पथरी सर्जरी (Ureteric Stone Surgery) (यूरेटेरोस्कोपी लेज़र लिथोट्रिप्सी और स्टेंटिंग के साथ) की आम कीमत सीमा ₹60,000 से ₹1,50,000 है।
अंतिम खर्च इस्तेमाल की गई तकनीक (सेमीरिजिड या फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी), पथरी के आकार और जगह, DJ स्टेंट लगाया गया है या नहीं, एनेस्थीसिया के प्रकार, और अस्पताल में रहने की अवधि (डेअकेयर या एक रात) पर निर्भर करता है। डायग्नोस्टिक टेस्ट जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी), खून की जाँच, और पेशाब की जाँच अलग से बिल होती हैं।
जयपुर हॉस्पिटल RGHS, मा योजना, CGHS, और प्राइवेट इंश्योरर्स व TPAs के पैनल में शामिल है। अगर आप इनमें से किसी योजना के तहत कवर हैं, तो अस्पताल का इंश्योरेंस डेस्क प्री-ऑथराइजेशन और जहां लागू हो कैशलेस एडमिशन में मदद करेगा। एडमिशन के दिन अपना योजना या बीमा कार्ड, फोटो ID, और कोई रेफरल लेटर साथ लाएं।
अस्पताल में इन-हाउस फार्मेसी और डायग्नोस्टिक लैब है, इसलिए सभी टेस्ट और दवाएं साइट पर ही कोऑर्डिनेट हो सकती हैं।